हिन्दी कवि आत्म रंजनका कविता

हिन्दी कवि आत्मा रञ्जनका केही टुक्रा कविताहरु ।

१ मरेको मान्छे

हुन त
यो धेरै थोरै हुन्छ

जहिले पनि
मरेको मान्छे चिच्याउँदा
जीवित जस्तै हुनजान्छ
झन् बलियो
र डरलाग्दो !

२ शक्ति पूजा

सधैँ सधैँ
हामी खोजिरहन्छौँ
अरुका कमजोरीहरू

कि हुन सकौँ
धेरै बलियो ।

३ बाटो

विचलित पनि भयौँ
लर्बरायौंं पनि
कति धेरै चोटहरु पनि खायौँ ।

गोरेटोहरु साक्षी छन्
कोदाली, गैँती
खाल्डो खन्ने मेशिनले होइन
खुट्टाहरुले बनाएका हुन्
बाटोहरू

४ नुहाइरहेका बच्चाहरु

मात्रै आमाले
नुहाइदिन सक्छिन् बच्चाहरुलाई
यसरी ।

या त फेरि धूलोले
या घामले ।

५ घरदेखि टाढा

बिहानसाँझको गनगन
घरका सारा झन्झटहरुबाट
छुटकारा पाउन
मनले भर्छ उडान

घरदेखि जति टाढा
निस्की जान्छौँ हामी
उत्तिनै याद आउँछ घर ।

हिन्दी


मरा हुआ आदमी


(एक)
बहुत पहले की बात है
सोया हुआ था एक आदमी
घने अंधेरे में
बिल्कुल जड़, प्रतिरोध रहित

मृत जान उन्होंने
कर डाला उसका अन्तिम संस्कार

नहीं यह
बहुत पुराना अंधेरा नहीं
आज का ही कोई सभ्य दिन है।

(दो)

अलबत्ता
यह बहुत कम होता है

चीखता है जब भी
मरा हुआ आदमी
जीवित से हो जाता है
ज़्यादा ताकतवर
खौ़फ़नाक !

शक्ति पूजा


लगातार लगातार
तलाश रहे हैं
दूसरों की कमियां

कि हो सके
ताकतवर।

रास्ते


डिगे भी हैं
लड़खड़ाए भी
चोटें भी खाई कितनी ही

पगडंडियां गवाह हैं
कुदलियों, गैंतियों
खुदाई मशीनों ने नहीं
कदमों ने ही बनाए हैं –
रास्ते!

नहाते बच्चे


सिर्फ माँ ही
नहला सकती है बच्चों को
इस तरह

या फिर धूल
या धूप !

घर से दूर


सुबह शाम की चिक चिक
घर के तमाम झमेलों से
निजात पाने को
मन भरता है उड़ान

घर से जितनी दूर
निकल आते हैं हम
उतना ही याद आता है घर।

अनुवादक: चन्द्र गुरुङ

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